Tuesday, 31 January 2017

अखिल भारतीय वरिष्ठ पत्रकार संघ एवं ऑल इंडिया सोशल मीडिया फोरम की एक मीटिंग रविवार दिनांक 5.2.2017 को

अखिल भारतीय वरिष्ठ पत्रकार संघ एवं ऑल इंडिया सोशल मीडिया फोरम की एक मीटिंग रविवार दिनांक 5.2.2017 को रखी गई है, इसमें इन संगठनों से जो जुड़ना चाहते हैं तथा इन संगठनों से जुड़कर जो संगठन एवं समाज हित में योगदान देना चाहते हैं, पर विचार कर निर्णय लिया जावेगा, अतः ऐसे लेखक एवं पत्रकार बंधू सादर आमंत्रित है।
इस मीटिंग में शामिल होने के लिए पूर्व सूचना आवश्यक है, अतः जो इन संगठनों से जुड़ना चाहते हैं, वे अपना नाम एवं मोबाइल नम्बर निम्न व्हाट्स एप्प नंबर पर प्रेषित करें।
- मनोज जैन, जर्नलिस्ट 9782285600

Monday, 9 January 2017

नोटबंदी के प्रति आलोचना का मुख्य मुद्दा हुआ समाप्त

कड़े निर्णयों से ही देश बन सकेगा समृद्धिशाली विकसित राष्ट्र
                                                               (लेख  - ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी)

मोदी सरकार के नोटबंदी के निर्णय पर तरह तरह से सवाल उठा रहे लोगों के पास अब इसको लेकर आलोचना का एक मुख्य मुद्दा भी अब समाप्त हो गया, जब आई. टी. विभाग ने निर्देश जारी कर 8 नवम्बर से पहले बैंक बचत खातों में हुए लेन देन की जानकारी हेतु बैंकों के लिए आदेश जारी कर दिए। सैन्ट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज (सी.बी.डी.टी) द्वारा 6 जनवरी को जारी राजपत्रित अधिसूचना में कहा गया है कि सभी बैंक मूल भूत बचतों तथा समय आधारित जमाओं को छोड़कर सभी नकद जमाओं की पूरी जानकारी आयकर विभाग को उपलब्ध कराएं।
ज्ञातव्य है की भाजपा सरकार पर यह आरोप विगत कई दिनों से लग रहा था कि नोटबंदी की जानकारी भाजपा के कई नेताओ को पूर्व से ही थी, अत: नोटबंदी के निर्णय से पूर्व ही इनके द्वारा 500 एवं 1000 के नोट बदलने का कार्य बड़े स्तर पर हो गया।  इसके मद्देनजर कई राजनैतिक पार्टियों के नेता यह मांग कर रहे थे कि सरकार 8 नवम्बर 2016 के पहले बैंकों में हुए लेन देन को सामने लाने के निर्देश जारी करे, क्योंकि नोटों को बदलने का कार्य तो 8 नवम्बर से पूर्व ही हो गया था। 
आयकर विभाग द्वारा अब सभी बैंकों और डाकघरों से 1 अप्रेल 2016 से 9 नवम्बर के बीच सेविंग अकाउंट में जमा होने वाले कैश डिपॉजिट की रिपोर्ट मांगी है। आयकर विभाग ने नोट बंदी से पहले हुए लेनदेन के बारे में जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से यह रिपोर्ट मांगी है। इस निर्णय से मोदी सरकार की एक और निष्पक्षता सामने आ गई है, वहीं इस तरह की मांग के साथ नोट बंदी के प्रति आलोचना कर रहे आलोचकों के पास अब इस मुद्दे पर कहने के लिए कुछ ख़ास नहीं रहा है। यदि सरकार 9 नवंबर से पूर्व बैंक डिपाजिट संबंधी लेनदेन को सख्ती के साथ निर्धारित समय सीमा में प्राप्त कर इसकी सूचना सार्वजनिक कर देती है तो यह देश के इतिहास में ऐसा कदम कहलाएगा जिसकी तुलना किसी अन्य साहसिक निर्णय से करना कठिन हो जावेगा, वहीँ यह कदम सदभावना पूर्वक आलोचना करने वालों को भी यह कहने को मजबूर कर देगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की कथनी और करनी एक है, उनकी नजर में सब बराबर है, यदि कोई गलत कर रहा है चाहे भाजपा का नेता हो, या दूसरी पार्टी का, इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं है। कानून की नज़र में सब बराबर है, जिसने जो किया है उसकी उसे सजा भुगतनी ही होगी।  
उल्लेखनीय है कि सम्पति शोध कंपनी न्यू वर्ल्ड के अनुसार रूस के बाद भारत दुनिया का सबसे ज्यादा असमानता वाला देश है, जहाँ पर 54 प्रतिशत सम्पति मात्र कुछ करोड़पतियों के हाथ में है। भारत दुनिया के 10 सबसे अमीर देशों में है, जहाँ कुल संपत्ति 5600 अरब डॉलर है, लेकिन औसतन भारतीय गरीब है। वैश्विक तौर पर रूस दुनिया का सबसे ज्यादा असमानता वाला देश है,जहाँ कुल सम्पति के 62 प्रतिशत पर मात्र कुछ धन कुबेरों का नियंत्रण है। वहीँ दूसरी तरफ जापान दुनिया में सबसे ज्यादा समानता वाला देश है, जहाँ धनवान लोगों के हाथ में कुल सम्पति का 22 प्रतिशत हिस्सा है। आस्ट्रेलिया में कुल सम्पति के 28 प्रतिशत पर धन कुबेरों का आधिपत्य है, इसके बाद अमेरिका एवं ब्रिटेन भी समानता वाले देशों में है, इनमें कुल सम्पति के क्रमशः 32 प्रतिशत एवं 35 प्रतिशत पर धनाढ्य लोगों का कब्ज़ा है। संपत्ति के आधार पर देशों में असमानता वाली यह जानकारी hindi.cobrapost.com में दर्शाई गई है। 
संपत्ति में असमानता की दृष्टि से भारत दूसरा बड़ा राष्ट्र है जहाँ सम्पति की दृष्टि वाली इस असमानता को एक दिन में नहीं सुधारा जा सकता। जापान एवं आस्ट्रेलिया जैसी धन की समानता वाली स्थिति में लाने के लिए भी सरकार को बिना भेद भाव के ऐसे कई कड़े निर्णय लागू करने पड़ेंगे। कड़े निर्णय लेना और उनको दृढता से लागू करना, दो अलग अलग पहलू हैं। पहले यह सोचना कि निर्णय कैसा है, इसके दूरगामी परिणाम क्या क्या हो सकते हैं, दूसरा इसको कैसे लागू किया गया है, इसमें क्या चूक थी जिसकी वजह से जो संभावित लाभ थे वे एकदम से नहीं मिल पाए हैं या भविष्य में संभावित तिथि से कितने दिन बाद तक प्राप्त हो पाएंगे। ये दोनों बातें अलग अलग है।
नोटबंदी का यह निर्णय नि:संदेह ऐसा निर्णय है जो अत्यंत कड़ा अवश्य है किंतु इसका फल ठीक वैसे ही है, जैसे कोई खाने की कड़वी ऐसी चीज जो खाने में बेहद कड़वी अवश्य होती है किन्तु पेट एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत गुणकारी एवं स्वस्थकारक सिद्ध होती है। इस साहसिक निर्णय की जितनी सराहना की जावे, वह कम ही कहलाएगी, क्योंकि इसके दूरगामी परिणाम इतने सुंदर होंगे, जिसकी हम अंशतः ही कल्पना कर पा रहे हैं।
नोटबंदी के पक्ष में मेरे ही ऐसे विचार हों, ऐसा मैं नहीं सोचता हूँ, यदि इस सम्बन्ध में अब तक हुए सबसे बड़े सर्वे के आंकड़ों को भी देखा जावे तो उससे भी प्रतीत होता है कि लाख तकलीफों के बावजूद भी ज्यादातर लोग मोदी जी के साथ खड़े है। यह सर्वे भी उस दौरान का है जब नोटबंदी लागू हुए कुछ ही दिन बीते थे और लोगों की परेशानियां बढ़ रही थी। इनसॉर्ट द्वारा ग्लोबल मार्केट रिसर्च कंपनी IPSOS की मदद से किए गए इस सर्वें में 82 फीसदी लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोट बंदी के फैसले को सही ठहराया था। यानी 2014 के लोकसभा चुनाव से भी बड़ा जनसमर्थन उन्हें इस मसले पर  मिलता हुआ नजर आ रहा था। सर्वे में जबकि 84 फीसदी जनता का मानना है कि काले धन को लेकर केंद्र सरकार वाकई गंभीर है। ग्लोबल मार्केट रिसर्च कंपनी IPSOS के सर्वे से पता चला है कि युवा भारत मोदी के समर्थन में खड़ा है। सिर्फ यंग इंडिया ही नहीं बल्कि अर्बन इंडिया ने भी ब्लैक मनी को लेकर सरकार की स्ट्रैटजी की सराहना की है। ये सर्वे करीब पांच लाख लोगों की राय पर आधारित था और उसमें भी करीब 80 फीसदी लोगो की उम्र 35 साल से कम थी। ऐसे में सर्वे के निष्कर्ष बतातें है कि देश का युवा और मेट्रो सिटी में रहने वाले लोग इस बात को मानते है कि काले धन और भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की जो रणनीति है वो काफी बेहतर हैं। उसकी सराहना की जा रही हैं। देश की जनता इस बात को भी मान रही है कि उन्हें तकलीफ हो रही है, लेकिन ब्लैक मनी और भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ खडी नजर आ रही है। यद्यपि यहाँ यह कहना उचित होगा कि किसी भी सर्वें को समस्त जनता की राय नहीं माना जा सकता है, यह एक संकेत भर होता है, एक अनुमान होता है, यह पूर्ण सत्य को भी दृष्टिगोचर कर सकता है और नहीं भी, क्योंकि  इसमें कुछ लोगों से ही रायशुमारी की जाती है। सर्वे की यह रिपोर्ट indiatrendingnow.com से ली गई है, सर्वे के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी इस साईट पर विजिट करके भी देखी जा सकती है। कुछ लोगों पर किए गए इस सर्वे के आंकड़ों से या मीडिया में दिखाई दे रहे लेखों से या विभिन्न इंटरव्यूज में, मोदी जी के इस निर्णय की सराहना ज्यादा आलोचना कम दिखाई दे रही है और अब जब 9 नवम्बर से पहले के लेनदेन को भी सामने लाने की पहल सम्बंधित विभाग द्वारा कर दी गई है, तो इस विषय पर आलोचना के लिए आलोचकों के पास कुछ विशेष नहीं रहा है।

Friday, 9 December 2016

नोट बंदी का निर्णय देश के इतिहास में राष्ट्र को उन्नति पर ले जाने के लिए साबित होगा एक सार्थक कदम - ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक अभूतपूर्व एवं साहसिक निर्णय लेकर 500 एवं 1000 के नोट बंद किए जाने के बाद पूरे राष्ट्र में सब जगह इसी पर बहस जारी हैं, कुछ इसे बहुत अच्छा एवं कुछ इसको लागू करने की प्रक्रिया को लेकर आलोचना कर रहे हैं। इतने दिन बीत जाने पर भी चाय की रेस्टोरेंट से लेकर बड़े से बड़े मॉल में ये चर्चा है कि इस निर्णय से अभी तो चारों तरफ बहुत सारी जनता कठिनाई झेल रही है, भविष्य में क्या इसके सुखद परिणाम भी सामने आएँगे, इस कदम से भाजपा को क्या लाभ होंगे, उसके सुन्दर भविष्य के लिए ये कदम कैसा साबित होगा, तरह तरह की बातें सोशल मीडिया पर दिन भर चलना आज दिन तक जारी है।
ज्योतिषीय पृष्ठभूमि लिए हुए अखिल भारतीय वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक संघ के संयोजक एवं ऑल इंडिया सोशल मीडिया फोरम के अध्यक्ष ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी ने इस कदम को देश के सुन्दर भविष्य के लिए अत्यंत सार्थक कदम बताया है, निर्णय की घोषणा के तुरंत बाद भी इसे सरकार का ऐतिहासिक एवं सराहनीय कदम बताया था। अब ज्योतिषीय आधार पर भी देश के लिए भावी रूप से आगे जाकर अत्यंत उन्नति कारक बताते हुए उन्होंने कहा है कि इससे वर्तमान में तो चोंकाने वाले एवं अटपटे कई रहस्य तो उजागर होंगे ही, कुछ और सराहनीय के साथ कठोर निर्णय भी होंगे, कई परिस्थितियों के चलते काफी समय स्थिति प्राय:कर किसी न किसी वर्ग को असंतोषजनक ही महसूस होती रहेगी, सोना एवं प्रॉपर्टी मंदी की ओर बढ़ सकते हैं, विश्व में भी बहुत सी जगह नेचर सम्बन्धी, हारी - बीमारी संबंधी, अग्नि कारक, कई तरह से अशांतिकारक - असंतोषकारक एवं अन्य प्रकार की बड़ी दिक्कतें कुछ न कुछ समय के अंतराल में झेलनी पड़ेगी, किन्तु इधर कई दिक्कतों, परेशानियों, विरोधों एवं झटकों के बावजूद भाजपा सरकार के ऐसे कई निर्णय आगे जाकर अधिक मजबूती के साथ देश को उतरोत्तर उन्नति पर ले जाने में सिद्ध एवं सफल होंगे, कई बड़े स्तरों पर समर्थन, साथ या लाभ भी प्राप्त हो सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के लिए काम के भारी बोझ के चलते स्वास्थ्य आदि पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है चूँकि वे साढ़े सत्ती के तीव्र प्रभाव में चल रहे हैं. इसके चलते ज्यादा भागदौड़, तनाव, विरोध, कष्ट आदि विभिन्न प्रकार से संभावित रहते हैं, इस साढ़े सत्ती के संभावित विभिन्न दुष्प्रभावों को जानने के लिए विद्वान ज्योतिषियों - शुभचिंतकों को विशेष ध्यान देना चाहिए तथा दुष्प्रभावों से बचने के लिए आध्यात्मिक साधना के रूप में योग, ध्यान, मन्त्र अनुष्ठान, दान आदि पर भी विशेष ध्यान केन्द्रित करना चाहिए.

Sunday, 13 November 2016

बैंकों में पुरानी मुद्रा के रूप में जमा राशि पर आयकर विभाग द्वारा लिए गए फैसलों से संबंधित सवालों पर वित्त सचिव डॉ. हसमुख अधिया द्वारा दिए गए कुछ जवाब

सवाल 1: बहुत सारे छोटे व्यापारियोंगृहिणियोंकारीगरोंकामगारों के पास बचत के रूप में कुछ नकद राशि घरों में रखे हो सकते हैंक्या अगर उसे बैंक में जमा कराने जाने पर आयकर विभाग पैसों को लेकर पूछताछ करेगा।
जवाब 1: सवाल में दिए गए वर्ग के लोग जो 1.5 या 2 लाख रुपये जमा कराने के लिए जाते हैं उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं हैक्योंकि ये आयकर की न्यूनतम सीमा के भीतर है। इस तरह की छोटी जमा राशि के लिए आयकर विभाग किसी को भी परेशान नहीं करेगा।
सवाल 2: क्या इस दौरान जमा की गई नकद रकम की रिपोर्ट आयकर विभाग लेगा। अगर हांतो क्या 10 लाख नकदी जमा की सीमा को पार करने पर सूचित करने का वर्तमान नियम आगे भी जारी रहेगी।
जवाब 2: हम 10 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच जमा कराई जाने वाली 2.5 लाख से ऊपर की हर नकदी रकम का और ऐसे खाते का हिसाब लेंगे। विभाग इस रकम और इसे जमा कराने वाले व्यक्ति द्वारा फाइल की गई आयकर रिटर्न का मिलान कर जांच करेगा। उसके बाद उसपर उचित कार्रवाई की जा सकती है।
सवाल 3: मान लीजिए की विभाग को ये पता चलता है कि किसी खाते में 10 लाख से ज्यादा की रकम जमा की गई है और वो रकम जमाकर्ता की घोषित आय से मेल नहीं खा रही है। ऐसे में जमाकर्ता पर कितना कर और जुर्माना लगाया जाएगा।
जवाब 3: इस तरह के मामलों को कर चोरी माना जाएगा। इन मामलों में आयकर अधिनियम की धारा 270 (ए) के हिसाब से कर की राशि वसूली जाएगी और साथ ही भुगतेय कर के अलावा 200% की राशि जुर्माना के रूप में भी वसूली जाएगी।
सवाल 4: ऐसा माना जा रहा है कि बहुत सारे लोग अब आभूषण खरीद रहे हैंइससे निबटने के लिए विभाग किस तरह से तैयारी कर रहा है?
जवाब 4: जो भी व्यक्ति आभूषण खरीदता है उसे पैन नंबर देना होता है। हम क्षेत्रिय प्राधिकारियों को ये निर्देश जारी कर रहे हैं कि ये सुनिश्चित की जाए कि सभी  आभूषण विक्रेता इस नियम का पालन करने में किसी तरह का समझौता ना हो पाए। उन आभूषण विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो आभूषण बिक्री के समय पैन नंबर नहीं लेते हैं। जब आभूषण बिक्री के बाद विक्रेता द्वारा नकद राशि जमा कराई जाएगी तब इसकी जांच की जाएगी कि वो बेचे गए आभूषण की रकम से मेल खाते हैं या नहीं। बिक्रेता ने ग्राहक का पैन नंबर लिया है या नहीं इसकी भी जांच की जाएगी।
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पीकेटी/एमएस- 4988

Wednesday, 12 October 2016

अखिल भारतीय वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक संघ का गठन - श्री निर्मल सौगानी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महावीर कुमार सोनी राष्ट्रीय संयोजक बने

जयपुर। पत्रकारों एवं लेखकों के हितों के साथ उनकी समस्याओं के लिए संघर्ष करने के लिए विजयदशमी के पावन अवसर पर "अखिल भारतीय वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक" संघ के नाम से पत्रकारों के लिए एक नए मंच का गठन किया गया। इस मंच के गठन को लेकर पूर्व में कई बार आज की सभा में उपस्थित पत्रकारों एवं लेखकों की आपसी चर्चाओं एवं दूरभाष वार्ताओं के बाद इसे गठन करने के लिए कल विजयदशमी का दिन तय किया गया था। भारत गौरव श्री निर्मल सौगानी के जयपुर में केशवनगर स्थित कार्यालय परिसर में रात्रि 8 बजे इस गठन को अंतिम रूप प्रदान किया गया। इस मंच के उद्देश्यों एवं नाम आदि को लेकर काफी देर आपस में चर्चा के बाद इस संघ का नाम सर्वसम्मति से "अखिल भारतीय वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक संघ" रखने की घोषणा की गई। मंच के गठन के लिए काफी समय से प्रयासरत वरिष्ठ पत्रकार श्री महावीर कुमार सोनी ने उपस्थित लोगों के समक्ष श्री निर्मल सौगानी को इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा, उपस्थित सभी लोगो ने हाथ उठाकर हर्ष के साथ इसके लिए सहमति प्रदान की, इस प्रकार निर्मल सौगानी सर्व सम्मति से इस संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए, इसके बाद स्वतन्त्र पत्रकार श्रीमती नीलम जैन ने इस मंच के राष्ट्रीय संयोजक के लिए सरकारी तन्त्र द्वैमासिक पत्रिका के प्रधान संपादक श्री महावीर कुमार सोनी का नाम प्रस्तावित किया, सभी ने हाथ उठाकर हर्ष की ध्वनि के साथ इस पर सहमति व्यक्त की, इस प्रकार श्री सोनी सर्व सम्मति से इसके राष्ट्रीय संयोजक चुने गए। वरिष्ठ पत्रकार हेमन्त गोदीका ने मंच की उद्देश्य एवं कार्य व्यवस्थाओं पर प्रकाश डालते हुए प्रस्ताव रखा कि इस मंच को श्री सौगानी एवं श्री सोनी संयुक्त रूप से नेतृत्व प्रदान करेंगे, दोनों की सहमति से ही मंच के लिए अन्य पदों का मनोनयन एवं अन्य सभी प्रमुख निर्णय लिए जाएंगे, संघ को तीव्र गति प्रदान करने के लिए इस संघ का एक मुखपत्र भी अति शीघ्र शुरू किया जाएगा, संबंधी प्रस्ताव रखे, उपस्थित लोगो से इस सम्बन्ध में हाथ उठाकर मत की अपेक्षा की गई, सभी ने श्री गोदीका के उक्त प्रस्ताव पर हाथ उठाकर सर्व सम्मति व्यक्त की और गठन को उक्त रूप में मंजूरी दी गई।
उपस्थित सभी लोगों ने मंच में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए एक दूसरे को बधाई देते हुए श्री निर्मल सौगानी एवं श्री महावीर कुमार सोनी को इस नई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए बधाई दी और आशा व्यक्त की कि दोनों ही व्यक्ति वरिष्ठ पत्रकार के साथ कुशल नेतृत्वकर्ता एवं सामाजिक नेता है, अतः हम पूरी आशा करते है कि दोनों का संयुक्त नेतृत्व भारत के पत्रकारों एवं लेखकगणों के हितों के लिए अधिक से अधिक कार्य करने में सफल होगा।
गठन के इस कार्यक्रम के अंत में श्री सौगानी एवं श्री सोनी ने संयुक्त रूप से समाजसेवी गतिविधियों में सहयोगी होने संबंधी प्रेरणा देने वाले एक पोस्टर का लोकार्पण किया।⁠⁠⁠⁠

Saturday, 23 July 2016

राजस्थान में आमजन के हित में विभिन्न सहायता योजनाएं

इस संसार में परोपकार करने की भावना लगभग हर व्यक्ति में होती है। हमारे अपने भीतर भी ऎसे विचार आते हैं किंतु सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण हम प्रायः जीवन में दो-चार हजार रुपये की चैरिटी करके आत्मसंतुष्टि प्राप्त कर लेते हैं किंतु एक ऎसा तरीका भी है जिसके माध्यम से हम अपने पास-पड़ौस में रहने वाले अथवा अपने घर में काम करने वाले किसी निर्धन व्यक्ति या परिवार को इतनी आर्थिक मदद पहुंचा सकते हैं कि उस परिवार का पूरा भविष्य ही बदल जाये। इस कार्य में हमारी जेब से कोई रुपया खर्च नहीं होगा, राजस्थान सरकार के बहुत से ऎसे विभाग हमारे इस पुण्य कार्य के लिये रुपया खर्च करने को तैयार हैं।       राजस्थान सरकार ने वर्तमान में विभिन्न विभागों के माध्यम से एक सौ से अधिक ऎसी योजनाएं चला रखी हैं जिनके माध्यम से आप गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता दिलवा सकते हैं। झालावाड़ जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने इन योजनाओं में से 89 ऎसी योजनाएं चुनकर एक पुस्तिका तैयार करवाई है जो पूरी तरह से जन्मजात कन्याओं से लेकर, स्कूली बालिकाओं, प्रौढ़ महिलाओं, विधवाओं, एकल महिलाओं, परित्यक्ताओं तथा वृद्धाओं के लिये समर्पित हैं। इनमें से 40 योजनाएं प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभागों के माध्यम से, 28 योजनाएं सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग के माध्यम से,           15 योजनाएं श्रम कल्याण विभाग के माध्यम से, 3 योजनाएं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से तथा 3 योजनाएं महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित की जाती हैं। मैं यहां केवल तीन बड़ी योजनाओं की चर्चा कर रहा हूँ जिनका लाभ आप किसी गरीब परिवार को तुरंत दिलवा सकते हैं। वह परिवार जीवन भर आपका अहसानमंद रहेगा। राजश्री योजना राजस्थान सरकार ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से 1 जून 2016 से राजश्री योजना आरम्भ की है। इस योजना में किसी महिला को चिकित्सा संस्थान में पुत्री को जन्म देने पर तुरंत 2500 रुपये दिये जाते हैं। बालिका के जन्म की प्रथम वर्षगांठ पर पुनः 2500 रुपये दिये जाते हैं। जब बालिका किसी सरकारी स्कूल में कक्षा 1 में प्रवेश लेती है तो उसे 4000 रुपये दिये जाते हैं। बालिका द्वारा कक्षा 5 में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये, कक्षा 10 में प्रवेश लेने पर 11 हजार रुपये तथा कक्षा 12 उत्तीर्ण करने पर 25 हजार रुपये की राशि बालिका की मां को दी जाती है। इस प्रकार एक बालिका के पालन-पोषण के लिये उसकी मां को पचास हजार रुपये दिये जाते हैं। एक माता को यह सहायता दो बालिकाओं तक के लिये दी जा सकती है। इस बालिका को जननी शिशु सुरक्षा योजना के अंतर्गत मिलने वाले 1400 रुपये (ग्रामीण क्षेत्र में) अथवा 1000 रुपये (नगरीय क्षेत्र में) अलग से मिलेंगे तथा अन्य विभागों से मिलने वाली योजनाओं का लाभ भी मिलेगा। प्रसूति सहायता योजना यदि कोई महिला श्रम कल्याण विभाग में श्रमिक के रूप में पंजीकृत है तो उसके प्रथम प्रसव में लड़का होने पर 20 हजार रुपये तथा लड़की होने पर 21 हजार रुपये श्रम कल्याण विभाग द्वारा दिये जाते हैं। पुत्री के जन्म के समय माता की आयु कम से कम 20 वर्ष होनी चाहिये तथा पुत्री का जन्म किसी चिकित्सा संस्थान में होना चाहिये (घर पर नहीं)। कोई भी श्रमिक महिला प्रथम दो प्रसवों पर अर्थात् जीवन में कुल दो बार यह सहायता राशि प्राप्त कर सकती है। इसके लिये श्रम कल्याण विभाग में आवेदन करना होता है। विवाह सहायता योजना यदि कोई महिला श्रम कल्याण विभाग में निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीकृत है तो वह अपनी दो पुत्रियों के विवाह के लिये 55-55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता, उस पुत्री के 18 साल अथवा उससे अधिक आयु होने पर श्रम विभाग से ले सकती है। इसके लिये 18 साल पूरे करने वाली लड़की का आठवीं पास होना जरूरी है। आसान है श्रमिक के रूप में पंजीयन करवाना      जो स्त्री या पुरुष साल भर में किसी संस्थान में, किसी के घर पर या किसी ठेकेदार के पास कम से कम 100 दिन तक निर्माण श्रमिक के रूप में मजदूरी करते हैं, वे अपना पंजीयन श्रम कल्याण विभाग में आसानी से करवा सकते हैं। पांच साल के पंजीयन के लिये 85 रुपये पंजीयन शुल्क लगता है।
इस संसार में परोपकार करने की भावना लगभग हर व्यक्ति में होती है। हमारे अपने भीतर भी ऎसे विचार आते हैं किंतु सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण हम प्रायः जीवन में दो-चार हजार रुपये की चैरिटी करके आत्मसंतुष्टि प्राप्त कर लेते हैं किंतु एक ऎसा तरीका भी है जिसके माध्यम से हम अपने पास-पड़ौस में रहने वाले अथवा अपने घर में काम करने वाले किसी निर्धन व्यक्ति या परिवार को इतनी आर्थिक मदद पहुंचा सकते हैं कि उस परिवार का पूरा भविष्य ही बदल जाये। इस कार्य में हमारी जेब से कोई रुपया खर्च नहीं होगा, राजस्थान सरकार के बहुत से ऎसे विभाग हमारे इस पुण्य कार्य के लिये रुपया खर्च करने को तैयार हैं।       राजस्थान सरकार ने वर्तमान में विभिन्न विभागों के माध्यम से एक सौ से अधिक ऎसी योजनाएं चला रखी हैं जिनके माध्यम से आप गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता दिलवा सकते हैं। झालावाड़ जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने इन योजनाओं में से 89 ऎसी योजनाएं चुनकर एक पुस्तिका तैयार करवाई है जो पूरी तरह से जन्मजात कन्याओं से लेकर, स्कूली बालिकाओं, प्रौढ़ महिलाओं, विधवाओं, एकल महिलाओं, परित्यक्ताओं तथा वृद्धाओं के लिये समर्पित हैं। इनमें से 40 योजनाएं प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभागों के माध्यम से, 28 योजनाएं सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग के माध्यम से,           15 योजनाएं श्रम कल्याण विभाग के माध्यम से, 3 योजनाएं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से तथा 3 योजनाएं महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित की जाती हैं। मैं यहां केवल तीन बड़ी योजनाओं की चर्चा कर रहा हूँ जिनका लाभ आप किसी गरीब परिवार को तुरंत दिलवा सकते हैं। वह परिवार जीवन भर आपका अहसानमंद रहेगा। राजश्री योजना राजस्थान सरकार ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से 1 जून 2016 से राजश्री योजना आरम्भ की है। इस योजना में किसी महिला को चिकित्सा संस्थान में पुत्री को जन्म देने पर तुरंत 2500 रुपये दिये जाते हैं। बालिका के जन्म की प्रथम वर्षगांठ पर पुनः 2500 रुपये दिये जाते हैं। जब बालिका किसी सरकारी स्कूल में कक्षा 1 में प्रवेश लेती है तो उसे 4000 रुपये दिये जाते हैं। बालिका द्वारा कक्षा 5 में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये, कक्षा 10 में प्रवेश लेने पर 11 हजार रुपये तथा कक्षा 12 उत्तीर्ण करने पर 25 हजार रुपये की राशि बालिका की मां को दी जाती है। इस प्रकार एक बालिका के पालन-पोषण के लिये उसकी मां को पचास हजार रुपये दिये जाते हैं। एक माता को यह सहायता दो बालिकाओं तक के लिये दी जा सकती है। इस बालिका को जननी शिशु सुरक्षा योजना के अंतर्गत मिलने वाले 1400 रुपये (ग्रामीण क्षेत्र में) अथवा 1000 रुपये (नगरीय क्षेत्र में) अलग से मिलेंगे तथा अन्य विभागों से मिलने वाली योजनाओं का लाभ भी मिलेगा। प्रसूति सहायता योजना यदि कोई महिला श्रम कल्याण विभाग में श्रमिक के रूप में पंजीकृत है तो उसके प्रथम प्रसव में लड़का होने पर 20 हजार रुपये तथा लड़की होने पर 21 हजार रुपये श्रम कल्याण विभाग द्वारा दिये जाते हैं। पुत्री के जन्म के समय माता की आयु कम से कम 20 वर्ष होनी चाहिये तथा पुत्री का जन्म किसी चिकित्सा संस्थान में होना चाहिये (घर पर नहीं)। कोई भी श्रमिक महिला प्रथम दो प्रसवों पर अर्थात् जीवन में कुल दो बार यह सहायता राशि प्राप्त कर सकती है। इसके लिये श्रम कल्याण विभाग में आवेदन करना होता है। विवाह सहायता योजना यदि कोई महिला श्रम कल्याण विभाग में निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीकृत है तो वह अपनी दो पुत्रियों के विवाह के लिये 55-55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता, उस पुत्री के 18 साल अथवा उससे अधिक आयु होने पर श्रम विभाग से ले सकती है। इसके लिये 18 साल पूरे करने वाली लड़की का आठवीं पास होना जरूरी है। आसान है श्रमिक के रूप में पंजीयन करवाना      जो स्त्री या पुरुष साल भर में किसी संस्थान में, किसी के घर पर या किसी ठेकेदार के पास कम से कम 100 दिन तक निर्माण श्रमिक के रूप में मजदूरी करते हैं, वे अपना पंजीयन श्रम कल्याण विभाग में आसानी से करवा सकते हैं। पांच साल के पंजीयन के लिये 85 रुपये पंजीयन शुल्क लगता है।